Wednesday

gand mare sayya


 
Erotic Story in Hindi Font with Pictures: गाण्ड मारे सैंया
 
हमारा घर दो मंज़िला है, नीचे के भाग में सास-ससुर रहते हैं और हमारा शयनकक्ष ऊपर के माले पर है।  हमारे शयनकक्ष की पिछली खिड़की बाहर गली की ओर खुलती है जिसके साथ एक पार्क है। पार्क के साथ ही एक खाली प्लॉट है जहाँ अभी मकान नहीं बना है। लोग वहाँ कूड़ा करकट भी डाल देते हैं और कई बार तो लोग सू सू भी करते रहते हैं।
उस दिन मैं सुबह जब उठी तो तो मेरी नज़र खिड़की के बाहर पार्क के साथ लगती दीवार की ओर चली गई। मैंने देखा एक 18-19 साल का लड़का दीवाल के पास खड़ा सू सू कर रहा है, वो अपने लण्ड को हाथ में पकड़े उसे गोल गोल घुमाते हुए सू सू कर रहा है। मैंने पहले तो ध्यान नहीं दिया पर बाद में मैंने देखा कि उस जगह पर दिल का निशान बना है और उसके अंदर पिंकी नाम लिखा है।
मेरी हँसी निकल गई। शायद वा उस लड़के की कोई प्रेमिका होगी। मुझे उसकी इस हरकत पर बड़ा गुस्सा और मैं उसे डाँटने को हुई पर बाद में मेरी नज़र उसके लण्ड पर पड़ी तो मैं तो उसे देखती ही रह गई। हालाँकि उसका लण्ड अभी पूर्ण उत्तेजित तो नहीं था पर मेरा अन्दाज़ा था कि अगर यह पूरा खड़ा हो तो कम से कम 8-9 इंच का तो ज़रूर होगा और मोटाई भी कम नहीं होगी।
अब तो रोज़ सुबह-सुबह उसका यह क्रम ही बन गया था। सच कहूँ तो मैं भी सुबह सुबह इतने लंबे और मोटे लण्ड के दर्शन करके धन्य हो जाया करती थी। कई बार रब्ब भी कुछ लोगों पर खास मेहरबान होता है और उन्हें इतना लंबा और मोटा हथियार दे देता है !
काश मेरी किस्मत में भी ऐसा ही लण्ड होता तो मैं रोज़ उसे अपने तीनों छेदों में लेकर धन्य हो जाती। पर पिछले 2-3 दिनों से पता नहीं वो लड़का दिखाई नहीं दे रहा था। वैसे तो वो हमारे पड़ोस में ही रहता था पर ज़्यादा जान-पहचान नहीं थी। मैं तो उसके लण्ड के दर्शनों के लिए मरी ही जा रही थी।
उस दिन दोपहर के कोई दो बजे होंगे, सास-ससुर जी तो मुरारी बापू के प्रवचन सुनने चले गये थे और गणेश के दुकान जाने के बाद काम करने वाली बाई भी सफाई आदि करके चली गई थी और मैं घर पर अकेली थी। कई दिनों से मैंने अपनी झाँटें साफ नहीं की थी, पिछली रात को गणेश मेरी चूत चूस रहा था तो उसने उलाहना दिया था कि मैं अपनी झाँटें सॉफ रखा करूँ ! नहाने से पहले मैंने अपनी झाँटें सॉफ करके अपनी लाडो को चकाचक बनाया, उसके मोटे होंठों को देख कर मुझे उस पर तरस आ गया और मैंने तसल्ली से उसमें अंगुली करके उसे ठंडा किया और फिर बाथटब में खूब नहाई।
गर्मी ज़्यादा थी, मैंने अपने गीले बालों को तौलिए से लपेट कर एक पतली सी नाइटी पहन ली। मेरा मूड पेंटी और ब्रा पहनने का नहीं हो रहा था। बार-बार उस छोकरे का मोटा लण्ड ही मेरे दिमाग़ में घूम रहा था। ड्रेसिंग टेबल के सामने शीशे में मैंने झीनी नाइटी के अंदर से ही अपने नितंबों और उरोज़ों को निहारा तो मैं तो उन्हें देख कर खुद ही शरमा गई।
मैं अभी अपनी चूत की गोरी गोरी फांकों पर क्रीम लगा ही रही थी कि अचानक दरवाज़े की घण्टी बजी। मुझे हैरानी हुई कि इस समय कौन आ सकता है?
मैंने दरवाज़ा खोला तो देखा कि सामने वही लड़का खड़ा था। उसने हाथ में एक झोला सा पकड़ रखा था। मेरा दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा था। मैं तो मुँह बाए उसे देखती ही रह गई थी, वो भी मुझे हैरानी से देखने लगा।
"वो.... मुझे गणेश भाई ने भेजा है !" 
"क.. क्यों .. ?"
"वो बता रहे थे कि शयनकक्ष का ए सी खराब है उसे ठीक करना है !"
"ओह.. हाँ आओ.. अंदर आ जाओ !"
मैं तो कुछ और ही समझ बैठी थी, हमारे शयनकक्ष का ए सी कुछ दिनों से खराब था, इस साल गर्मी बहुत ज़्यादा पड़ रही थी, गणेश तो मुझे ठंडा कर नहीं पाता था पर ए सी खराब होने के कारण मेरा तो और भी बुरा हाल था।
मैं उसे अपने शयनकक्ष में ले आई और उसे ए सी दिखा दिया। वो तो अपने काम में लग गया पर मेरे मन में तो बार बार उसके काले और मोटे तगड़े लण्ड का ही ख़याल आ रहा था।
"तुम्हारा नाम क्या है?" मैंने पूछा।
"जस्सी... जसमीत नाम है जी मेरा !"
"नाम से तो तुम पंजाबी लगते हो?"
"हाँ जी..."
"तुम तो वही हो ना जो रोज़ सुबह सुबह उस दीवाल पर सू सू करते हो?"
"वो.. वो.. दर असल....!!" इस अप्रत्याशित सवाल से वो सकपका सा गया।
"तुम्हें शर्म नहीं आती ऐसे पेशाब करते हुए?"
"सॉरी मेडम... मैं आगे से ध्यान रखूँगा!"
"कोई जवान औरत ऐसे देख ले तो?"
"वो जी बात यह है कि हमारे घर में एक ही बाथरूम है तो सभी को सुबह सुबह जल्दी रहती है !" उसने अपनी मुंडी नीची किए हुए ही जवाब दिया।
"हम्म... तुम यह काम कब से कर रहे हो?"
"बस 3-4 दिन से ही.....!"
उसकी बात सुनकर मेरी हँसी निकल गई, मैंने कहा, "पागल मैं सू सू की नहीं, ए सी ठीक करने की बात कर रही हूँ।"
"ओह... दो साल से यही काम कर रहा हूँ।"
"हम्म...? तुम्हें सू सू करते किसी और ने तो नहीं देखा?"
"प... पता नहीं !"
"यह पिंकी कौन है?"
"वो.. वो.. कौन पिंकी?"
"वही जिसके नाम के ऊपर तुम अपना वो पकड़ कर गोल गोल घुमाते हुए सू सू करते रहते हो?"
वो बिना बोले सिर नीचा किए खड़ा रहा।
"कहीं तुम्हारी प्रेमिका-व्रेमिका तो नहीं?"
"न... नहीं तो !"
"शरमाओ नहीं .... चलो सच बताओ ?" मैंने हँसते हुए कहा।
"वो ... वो.. दर असल मेरे साथ पढ़ती थी !"
"फिर?"
"मैंने पढ़ाई छोड़ दी !"
"हम्म !!"
"अब वो मेरे साथ बात नहीं करती !"
"तुम्हारी इस हरकत का उसे पता चल गया तो और भी नाराज़ होगी !"
"उसे कैसे पता चलेगा?"
"क्या तुम्हें उसके नाम लिखी जगह पर सू सू करने में मज़ा आता है?"
"हाँ... ओह.. नही.... तो मैं तो बस... ऐसे ही?"
"हम्म... पर मैंने देखा था कि तुम तो अपने उसको पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से हिलाते भी हो?"
"वो.. वो...?" वो बेचारा तो कुछ बोल ही नहीं पा रहा था।
"अच्छा तुमने उस पिंकी के साथ कुछ किया भी था या नहीं?"
"नहीं कुछ नहीं किया !"
"क्यों?"
"वो मानती ही नहीं थी !"
"हम्म... चुम्मा भी नहीं लिया?"
"वो कहती है कि वो एक शरीफ लड़की है और शादी से पहले यह सब ठीक नहीं मानती !"
"अच्छा... चलो अगर वो मान जाती तो क्या करते?"
"तो पकड़ कर ठोक देता!"
"हाय रब्बा .... बड़े बेशर्म हो तुम तो?"
"प्यार में शर्म का क्या काम है जी?" अब उसका भी हौसला बढ़ गया था।
"क्या कोई और नहीं मिली?"
वो हैरानी से मेरी ओर देखने लगा, अब तक उसे मेरी मनसा और नीयत थोड़ा अंदाज़ा तो हो ही गया था।
"क्या करूँ कोई मिलती ही नहीं !"
"तुम्हारी कोई भाभी या आस पड़ोस में कोई नहीं है क्या?"
"एक भरजाई (भाभी) तो है पर है पर वो भी बड़े भाव खाती है !"
"वो क्या कहती है?"
"वो भी चूमा-चाटी से आगे नहीं बढ़ने देती !"
"क्यों?"
"कहती है तुम्हारा हथियार बहुत बड़ा और मोटा है मेरी फट जाएगी!"
"हम्म...साली नखरे करती है ?"
"हां और वो साली सुनीता भी ऐसे ही नखरे करती रहती है!"
"कौन? वो काम वाली बाई?"
"हाँ हाँ ! ... वही !"
"उसे क्या हुआ?"
"वो भी चूत तो मरवा लेती है पर ... ! गाण्ड नहीं मारने देती... !"
"हाय रब्बा... कीहोजी गल्लां कर्दा ए ?"
"सच कहता हूँ साली अपनी गाण्ड को ऐसे मटका कर चलती है जैसे सारी सड़क उसके पियो (बाप) दी ऐ!"
मेरी चूत तो उसकी बातों से पानी पानी हो चली थी, मैंने अपनी नाइटी के ऊपर से ही अपनी चूत की फांकों को मसलना चालू कर दिया। वो कनखियों से मेरी ओर देख रहा था।
"हम्म...?"
"उसकी मटकती गाण्ड बहुत ही जानमारू है.... !"
"हम्म...?"
"वैसे एक बात बताओ?"
"हम्म....?"
"मैं सच कहता हूँ आप भी बहुत खूबसूरत हैं !"
"कैसे?"
"आपकी फिगर तो कमाल की है !"
"हम्म....और क्या-क्या कमाल का है?"
मैं उसका हौसला बढ़ाना चाहती थी, मेरी चूत में तो गंगा-जमना बहने लगी थी, मैं सोच रही थी कि अब फज़ूल बातों को छोड़ कर सीधे मुद्दे की बात करनी चाहिए।
"वो .. वो आपके चूतड़... मेरा मतलब कमर बहुत पतली है!"
"कमर पतली होने से क्या होता है?"
"वो.. जी आपके चूतड़ बहुत गोल-मटोल और कातिलाना हैं !"
"अच्छा ? और?"
"आपके चूचे भी बहुत खूबसूरत हैं !"
"तुम्हें पसंद हैं?"
"हाँ जी... मैं तो आपको रोज़ देखता रहता हूँ ?"
"ओह.. कैसे.. ?"
"छत पर जब आप कपड़े सुखाने आती हैं तो मैं रोज़ देखता हूँ !"
"तुम बड़े बदमाश हो...?"
"जी... आप इतनी खूबसूरत हैं... तो बार बार देखने का मन करता है!"
"हम्म.... तो पहले क्यों नहीं बताया?"
"मैं डर रहा था !"
"क्यों?"
"कहीं आप बुरा ना मान जाएँ?"
"अगर बुरा ना मानू तो?"
"तो..... तो... ?"
उसका गला सूखने लगा था, उसकी कनपटियों से पसीना आने लगा था, मैंने देखा उसकी पैंट में उभार सा बनने लगा था। मैंने भी अपनी नाइटी के ऊपर से ही अपनी लाडो को फिर से मसलना चालू कर दिया, मेरी चूत में बिच्छू काटने लगे थे, बार-बार उसके लण्ड के ख़याल से ही मेरी लाडो पानी पानी हो गई थी, मेरा मन कर रहा था कि झट से इसकी पैंट की ज़िप खोल कर उसके लण्ड को निकाल कर अपनी चूत में डाल लूँ !
"क्या तुम इन खूबसूरत चूचों को देखना चाहोगे?"
"ओह.. हाँ नेकी और पूछ पूछ?"
"पर बस देखने ही दूँगी... और कुछ नहीं करने दूँगी।"
अब वो इतना भी फुद्दू भी नहीं था कि मेरा खुला इशारा ना समझता !
"कोई गल नई मेरी सोह्नयो !" कहते हुए उसने झट से मुझे अपनी बाहों में भर लिया और ज़ोर ज़ोर से मेरे होंठों को चूमने लगा।
मैंने अपना एक हाथ नीचे करके पैंट के ऊपर से ही उसके खड़े लण्ड को पकड़ लिया और उसे मसलने लगी। उसने अपने एक हाथ से मेरे स्तन दबाने चालू कर दिए और दूसरा हाथ मेरे नितंबों की खाई में फिराने लगा।
मेरी लाडो से रस निकल कर मेरी जांघों को भिगोने लगा था, मुझे लगा कि चूमा-चाटी के इन फज़ूल कामों को छोड़ कर सीधा ही ठोका-ठुकाई कर लेनी चाहिए। मैंने उसे पास पड़े सोफे पर धकेल दिया और उसकी पैंट की जीप खोल दी, फिर कच्छे के अंदर हाथ डाल कर उसका लण्ड बाहर निकाल लिया।
मेरे अंदाज़े के मुताबिक उसका काले रंग का लण्ड 8 इंच लंबा और 2 इंच मोटा था. मैंने उसके टोपे की चमड़ी को नीचे किया तो उसका गुलाबी सुपारा ऐसे चमकने लगा जैसे कोई मशरूम हो ! मैंने झट से उसका सुपारा अपने मुँह में भर लिया, मैं उकड़ू बैठ गई और ज़ोर ज़ोर से उसके लण्ड को चूसने लगी।वो तो आ.. ओह... ब... भरजाई जी ... एक मिनट... ओह... करता ही रह गया !
कहानी अगले भागों में जारी रहेगी।
 
राजू
 
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didi

Main man hee man soch raha tha kaya woh nazara phir repeat hoga kee Usha didi mere samne saare kapde uttar de aur main kuchh na karoon. Jab kee mujhe uss samay sex kee adadt nahi thee par ab to hain kaya woh sab ho payega.yeh soch kar main room main aagaya Coffee order kar main hath muh dhone laga Usha Bolee arre naha lete . Maine kaha nahi didi Ganga main nahange. Woh bolee meree coffee dak kar rakh dena main pehle naha loon..Coffee aa gayee aur main sip karne laga. Wash room se didi ke naha ne kee awaj aa rahi thee maan ho raha tha bath room main ghuss jaoo aur wohi Usha raani ko chod doo par kahte hain sabar ka phal mitha hota hain iss liye sabar kar ke baitha raha. Thodi der main nal band hua aur ek towel lapeteusha didi bahar aa gayee. Aur mere saamne khade hoker badan ko drawer se sukhane lagee. Main soch raha tha kee towel ab gira kee gira par towel bahut kass kar band rkah tha didi ne aur woh ab apne taange utha kar apnee taango ko sukha rahi thee Uska andhar kaa hissa deekhayee de raha tha bilkul saaf aur chikna. Dono honth alag alag dikhayee de rahee the aur woh bilkul apne aap main mast thee. Mere sabar kaa imtihan bahut ho chuka.
 
Yeh sab kuchh bahut tha mere lund ko khada karne ke liye.Usne mujh uske wardrobe se Bra panty laane ko kaha to main ek shareef bhai kee tarah uth kar lene chala gaya.Maine Bra panty lakar usse de diya aur maine uska towel kheench diya. Woh sann rah gayee aur bole Wah bhaiyya etne saal laga diye Himmat dikhane main. Ab woh mere saamne bilkul nangee khadi thee aur mera lund mere underwear se bahar aane ko tadap raha tha woh mere taraf dekh kar hansi aur usne bad kar mere underwear ka nada tod diya aur bolee oh itna lamba....... ...good aur mota bhi......... .aur jhat se usne mera lauda apne muh main le liya usne meree thighs ko Dabana shuru kiya aur mera josh badta jaa raha tha. Maine uske mamo ko pakad kar daban shuru kjar diya to woh kuch preshan see ho gayee bolee " kuchh jaldi karo main to sara rasta iske baare main sochti hue aayee huun so mujh se ab bardashat nahi hota please chhotu kuchh karo.. Maine usko bed par patak diya aur bina kissi introduction ke uske burr main apna lund thok diya aur jor jor se dhake marne laga . Woh kuchh der tak to bardashat karati rahi par phir woh jor jor se chilane lagi aur bolene lagi........ badi der kar dee bhaiyya..... .......nahi to banta tu mera saiyyan....par kuch bigda nahi jor laga kar pel de aur meree bur ko phad de..........ohhhhhh mera pyara bhaiyya..... .......!
 
Bur lund ka khel chalu hua to aaram se par jaldi hee usme tezi aa gayee aur main jor hor se chodne laga........ ..woh cheenkh rahee thee chilla rahi thee aur mera karyakaram jaari tha.......kareeb fifteen minutes chodne ke baad woh bhi shant pad gayee aur main bhi......... .......kafi der isse tarah pade rahe aur sham ko naha do kar Har kee paudi kee taraf chale gaye.Raat tak ghumte rahe mere kaan ke pass aakar bolee woh to mujhe bhuukh lagi thee maine kha liya imtihan to ab hoga chhotu ........aaj raat ko.......... . OK Usha didi.
 
Ab to didi na kaho Chhotu AB to tumhara mere andhar jaa chuka hain.Ok Usha rani pehle woh to khatam kar le jiske liye aaye hain.Arre chhotu woh to Pandit jee khatam kar chuke honge chalo unki fees de dee jaye.Ok hum log bahon main bahen dale mia bibi kee tarah ghumate rahe aur Pandit jee ko fee dekar apne Hotel hale gaye . Wahan jakar khane ka order diya aur sath main beer bhi lelee. Khane ke saath Beer ke do glass Usha rani ko aur main 4 Glass beer chada lee aur Aagle program ke liye taiyyar hone laage.Usha bolee Peh;le introduction Ho jaye. Meri pant kee zip kholte hue Bolee Chhotu ke pass jo kuchh hain woh yehi hain aur isse Lund bolte hain(arre chhotu yeh to kafi Bada ho gaya hain Piuchhlee baar jab maine dekha tha to chhota tha tere naam kee tarah)Haan Usha yeh ab sayana hua hain idhar 2 3 saal main iskee lambai aur motai 3 inch aur 1.5 inch badee hain.Haan mummy kehtee thee kee chhotu ka manhood bilkul apne mama par gaya hain..Kaya... ......... ......Kaya mummy ne mama ka lund dekha tha.Haan jaroor dekha hoga tabhi to bol rahi thee. Beer Rang dikha rahee thee aur Usha bhi. Usne mera lund apne muh main lekar chusna shuru kar diya aur halke halke main garam hone laga main bhi uskee chuchi ko hatho se masal raha tha aur anandit ho raha tha. Phir woh samay bhi aa gaya jab Usha Bolee ab to bed par chale hee chale to achha hain. Maine usko utha kar bed par le gaya aur bed par daal kar uske Golden gate ko khol kar apne lund uske golden gate ke muh par rakh diya aur dheere dheere pyar se strokes lagane laga. Dheere dheere mera lund inch by inch uske andar ghusta jaa raha tha aur woh ahhhhhhhhhhhhhhhh .......uhhhhhhhhhhh h...kar rahee thee. Jab maine full speed se strokes play karne laga to woh chilane lagee....... .....Bahut wild ho rahi thee woh aur aise chipak rahi thee jaisee mere andar ghuss jayegee par main itminana se chode ja raha tha. Aur phir waqt aa gaya jhadne kaa to woh aur wild ho gayee aur bolee....... ......bhar de meri chut ko apne garam garam cum e saale........Phir hum dono jhad kar pad gaye subuh tak yuhi pade rahe. Dophar ko chalne se pehle ek baar phir fuck kiya aur bill pay kar ghar aa gaye.Pichhle 14 dino se main Usha ke ghar hoon aur chod raha hoon.. Muhe to bahut maza aaya aur aa raha hain.......

Tuesday

: मस्त मेनका पार्ट--1-3


आज राजपुरा गाओं के राजा यशवीर सिंग का महल दुल्हन की तरह सज़ा हुई है & क्यू ना सजता, आज राजा साहब का बेटा विश्वजीत शादी करने के बाद अपनी नयी-नवेली दुल्हन को लेकर आया था.राजा साहब के घर मे अरसे बाद खुशियों ने कदम रखा था वरना पिच्छले दो सालों मे तो उन्हे बस दुख ही देखने को मिले थे.

मेहमानों की भीड़ हवेली के बड़े से बाग मे दूल्हा-दुल्हन को बधाई दे रही थी & पार्टी का लुत्फ़ उठा रही थी.राजा साहब ने मेहमानों की खातिर मे कोई कसर नही छ्चोड़ी थी.

जब तक राजा साहब मेहमानों की खातिर करते हैं,आइए तब तक हम उनके बारे मे तफ़सील से जान लेते हैं.राजा साहब अपने पिता की एकलौती औलाद थे.उनके पिता पूरे राजपुरा के मलिक थे.उन्होने राजा साहब को विदेश मे तालीम दिलवाई पर हुमेशा से 1 बात उन्होने यशवीर सिंग के दिमाग़ मे डाली कि चाहे कुच्छ भी हो जाए रहना उन्हे राजपुरा मे अपनी जनता के बीच मे ही रहना होगा.पर फिर रजवाड़ों का चलन ख़तम हो गया तो बाप-बेटे ने बड़ी होशियारी से अपने को बिज़्नेस्मेन मे तब्दील कर लिया.जहा कई राजाओं की हालत आम आदमियो से भी बदतर हो गई वोही राजा साहब & उनके पिता ने अपनी पोज़िशन और भी मज़बूत कर ली.

गाओं मे गन्ने की खेती होती थी तो राजा साहब ने शुगर मिल लगा दी & गाओं वालों को उसमे रोज़गार दे दिया.उनकी ज़मीन पे बड़े जंगल थे तो 1 पेपर मिल भी स्टार्ट कर दी,वाहा भी गाओं वाले ही काम करते थे.खेतों मे तो वो पहले से ही लगे हुए थे.
इस तरह पिता की मौत के बाद राजा यशवीर राजपुरा के बेताज बादशाह बन गये.लोकल एमलए & एंपी भी उनके आगे हाथ जोड़े खड़े रहते थे.वक़्त के साथ-2 राजा साहब करीब 15 मिल्स के मलिक बन गये.

राजा साहब का विवाह 1 बड़ी ही धर्म परायण महिला सरिता देवी से हुआ.राजा साहब व्यभिचारी तो नही थे फिर भी आम मर्दों की तरह सेक्स मे काफ़ी दिलचस्पी रखते थे,पर पत्नी के लिए चुदाई बस वंश बढ़ने का ज़रिया था और कुच्छ नही.इसलिए राजा साहब अपने शौक शहर मे पूरे करते थे.पर उन्होने अपनी पत्नी को कभी इसकी भनक भी नही लगने दी ना ही उन शहरी रांडों से कोई बहुत गहरा संबंध बनाया.वो तो बस उनके कुच्छ शौक पूरे करती थी जो उनकी पत्नी नही करती थी.अगर रानी साहिबा राजा साहब की इच्छायें पूरी करती तो राजा साहब कभी किसी और औरत के पास नही जाते.राजा साहेब अपने गाओं के किसी औरत को भी गंदी दृष्टि से नही देखते थे.

पर इस अच्छे इंसान को पहला बड़ा झटका उपरवाले ने आज से 2 साल पहले दिया.राजा साहब का बड़ा बेटा यूधवीर 1 कार आक्सिडेंट मे मारा गया.लोग कहते हैं कि वो आक्सिडेंट नही बलकी मर्डर था-किसी ने यूधवीर की कार के साथ च्छेदखानी की थी.खैर इस बारे मे हम कहानी मे आयेज बात करेंगे.बेटे की मौत का सदमा रानी सरिता देवी सह नही पाई और उसका नाम ले-2 कर भगवान को प्यारी हो गयी.यह सब 1 साल के भीतर-2 घटनाए घट गई.उस समय विश्वजीत विदेश से पढ़ाई करके लौटा था & आते ही उसे पिता का सहारा बनना पड़ा.

ऐसा नही है कि राजपुरा मे राजा साहब का एकच्छात्रा राज्य है.जब्बार सिंग नाम का एक ठाकुर बहुत दिनों से उनसे उलझता आ रहा है.लोग तो कहते हैं केयूधवीर की मौत मे उसी का हाथ था.जब्बार राजा साहब के दबाव को ख़तम कर खुद राजपुरा का बेताज बादशाह बनाना चाहता है.पर राजा साहब ने अभी तक उसके मन की होने नही दी है.

चलिए अब वापस चलते हैं महल को.
अरे ये क्या!पार्टी तो ख़तम हो गयी...सारे मेहमान भी चले गये. नौकर-नौकरानी भी महल के कॉंपाउंड मे ही बने अपने कमरों मे चले गये हैं.रात के खाने के बाद महल के अंदर केवल राजा साहब & उनके परिवार एवं खास मेहमानों को ही रहने का हुक्म है.

पर मैं आपको महल के अंदर ले चलता हूँ,सीधे विश्वजीत के कमरे क्यूकी अब मेनका से मिलने का वक़्त आ गया है.

मेनका-विश्वजीत की दुल्हन, नाम के जैसे ही बला की खूबसूरत...गोरा रंग,खड़ी नाक बड़ी-2 काली आँखें, कद 5'5" ...मस्त फिगर की मल्लिका.बड़े लेकिन बिल्कुल टाइट चुचियों & गांद की मालकिन. मेनका 1 बहुत कॉन्फिडेंट लड़की है जो कि अपने मन की बात सॉफ-2 लेकिन शालीनता से कहने मे बिल्कुल नही हिचकति.

मेनका सुहाग सेज पे सजी-धजी बैठी अपने पति का इंतेज़ार कर रही है.ये लीजिए वो भी आ गया..

मेनका & विश्वजीत शादी के पहले कई बार 1 दूसरे से मिले थे सो अजनबी तो नही थे पर अभी इतने करीबी भी नही हुए थे.विश्वा ने 4-5 बार उसके गुलाबी रसीले होठों को चूमा था...उसके नशीले कसे बदन को अपनी बाहों मे भरा था पर इससे ज़्यादा मेनका कुच्छ करने नही देती थी...पर आज तो वो सोच कर आया था कि उसे पूरी तरह से अपनी बना के रहेगा.

विश्वा पलंग पे मेनका के पास आकर बैठ गया.

"शादी मुबारक हो,दुल्हन",कह के उसने मेनका का गाल चूम लिया.

"मुबारकबाद देने का ये कौन सा तरीका है?",मेनका बनावटी नाराज़गी से बोली.

"अरे,मेरी जान.ये तो शुरूआर् है,पूरी मुबारका बाद देने मे तो हम रात निकाल देंगे".कह के उसने मेनका को बाहों मे भर लिया & उसे बेतहाशा चूमने लगा..गालों पे माथे पे .उसकी लंबी सुरहिदार गर्दन पे.उसके होठों को चूमते हुए वो उनपर अपनी जीभ फिराने लगा & उसे उसके मुँह मे डालने की कोशिश करने लगा.

मेनका इतनी जल्दी इतने तेज़ हमले से चौंक & घबरा गई & अपने को उससे अलग करने की कोशिश करने लगी.

"क्या हुआ जान?अब कैसी शरम!चलो अब और मत तद्पाओ",विश्वा उसके होठों को आज़ाद लेकिन बाहो की गिर्सफ़्त और मज़बूत करते हुए बोला.

"इतनी जल्दी क्या है?"

"मैं अब और इंतेज़ार नही कर सकता,मेनका.प्लीज़..."कहके वो फिर अपनी पत्नी को चूमने लगा.
पर इस बार जुंगली की तरह नही बल्कि आराम से थोड़ा धीरे-2.

थोड़ी ही देर मे मेनका ने अपने होठ खोल दिए & विश्वा ने अपनी जीभ उसके मुँह मे दाखिल करा दी और उसे बिस्तर पे लिटा दिया..उसकी बाहें अभी भी मेनका को कसे हुए थी & उसकी जीभ मेनका की जीभ के साथ खेल रही थी..उसका सीना मेनका की चूचियो को दबा रहा था & दाईं टाँग उसकी टाँगों के उपर थी..

थोड़ी देर ऐसे ही चूमने के बाद वो अपने हाथ आगे ले आया और ब्लाउस के उपर से ही अपनी बीवी की चूचिया दबाने लगा ...फिर उसने अपने होत उसके क्लीवेज पर रख दिए...मेनका की साँसें भारी हो गयी..धीरे-2 वो भी गरम हो रही थी.

पर विश्वजीत बहुत बेसबरा था और उसने जल्दी से मेनका का ब्लाउस खोल दिया & फिर रेड ब्रा मे क़ैद उसकी चूचियों पर टूट पड़ा....मेनका की नही-2 का उसके उपर कोई असर नही था.

मेनका के लिए ये सब बड़ा जल्दी था.वो 1 कॉनवेंट मे पढ़ी लड़की थी..सेक्स के बारे मे सब जानती थी पर कुच्छ शर्म & कुच्छ अपने खानदान की मर्यादा का ख़याल करते हुए उसने अबी तक किसी से चुडवाया नही था.विदेश मे कॉलेज मे कभी-कभार किसी लड़के के साथ किस्सिंग की थी बस.विश्वा को भी उसने शादी से पहेले किस्सिंग से आगे नही बढ़ने दिया था.

सो उसके हमले से वो थोड़ा अनसेटल्ड हो गयी.इसी का फायडा उठा कर विश्वजीत ने उसके सारी & पेटीकोआट को भी उसके खूबसूरत बदन से अलग कर दिया.अब वो केवल रेड ब्रा & पॅंटी मे थी.टांगे कस कर भीची हुई..हाथों से अपने सीने को ढकति हुई...शर्म से उसका चेहरा ओर गुलाबी हो गया था & आँखें बंद थी-मेनका सच मच भगवान इन्द्र के दरबार की अप्सरा मेनका जैसी लग रही थी.

विश्वा ने 1 नज़र भर कर उसे देखा और अपने कपड़े निकाल कर पूरा नंगा हो गया.उसका 4 1/2 इंच का लंड प्रिकम से गीला था.उसने उसी जल्दबाज़ी से मेनका के ब्रा को नोच फेका और उसका मुँह उसकी चूचियो से चिपक गया.वो उसके हल्के गुलाबी रंग के निपल्स को कभी चूस्ता तो कभी अपनी उंगलियों से मसलता.मेनका उसकी इन हरकतों से और गरम हो रही थी.फिर विश्वा उसकी चूचियो को छ्चोड़ उसके पेट को चूमता उसकी गहरी नाभि तक पहुचा.

जब उसने जीभ उसकी नाभि मे फिराई तो वो सीत्कार कर उठी,"आ....अहह.."

फिर वो और नीचे पहुचा,पॅंटी के उपर से उसकी चूत पर 1 किस ठोकी तो मेनका मारे शर्म के उठती हुई उसका सर पकड़ कर अपने से अलग करने लगी पर वो कहा मानने वाला था.उसने उसे फिर लिटाया & झटके के साथ उसकी पॅंटी खीच कर फेक दी.मेनका की चूत पे झाँत हार्ट शेप मे कटी हुई थी.ये उसकी सहेलियों के कहने पर उसने किया था.

"वाह!मेरी जान",विश्वा के मुँह से निकला,"वेरी ब्यूटिफुल पर प्लीज़ तुम इन बालों को सॉफ कर लेना.मुझे सॉफ बिना बालों की चूत पसंद है."

ये बात सुनकर मेनका की शर्म और बढ़ गयी.1 तो वो पहली बार किसी के सामने ऐसे नंगी हुई थी उपर से ऐसी बातें!

विश्वा ने 1 उंगली उसकी चूत मे डाल दी और दूसरे हाथ से उसके बूब्स मसल्ने लगा.मेनका पागल हो गयी.तभी वो उंगली हटा कर उसकी टाँगो के बीच आया और उसकी चूत मे जीभ फिराने लगा.अब तो मेनका बिल्कुल ही बेक़ाबू हो गयी.उसे अब बहुत मज़ा आ रहा था.वो चाहती थी की विश्वजीत ऐसे ही देर तक उसकी चूत चाटता रहे पर उसी वक़्त विश्वा ने अपना मुँह उसकी चूत से हटा लिया.

मेनका ने आँखें खोली तो देखा कि वो अपना लंड उसकी चूत पर रख रहा था.

वो मना करने के लिए नही बोलते हुए उसके पेट पर हाथ रखने लगी पर बेसब्र विश्वा ने 1 झटके मे उसकी कुँवारी नाज़ुक चूत मे अपना लंड आधा घुसेड दिया.यूँ तो मेनका की चूत गीली थी पर फिर भी पहल्ली चुदाई के दर्द से उसकी चीख निकल गयी,"उउउइईईईई........माअ.....अनन्न्न्न्न...न्न्न्न...ना...शियीयियी "

विश्वा उसके दर्द से बेपरवाह धक्के मारता रहा & थोड़ी देर मे उसके अंदर झाड़ गया.फिर वो उसके सीने पे गिर कर हाँफने लगा.

मेनका ने ऐसी सुहागरात की कल्पना नही की थी, उसने सोचा था कि विश्वा पहले उससे प्यारी-2 बातें करेगा.फिर जब वो थोड़ा कंफर्टबल हो जाए तब बड़े प्यार से उसके साथ चुदाई करेगा.पर विश्वा को तो पता नही किस बात की जल्दी थी.

"अरे...तुम्हारी खूबसूरती का रस पीने के चक्कर मे तो मैं ये भूल ही गया!",विश्वा अपने ज़मीन पर पड़े कुर्ते को उठा कर उसकी जेब से कुच्छ निकालते हुए बोला तो मेनका ने 1 चादर खीचकर अपने नंगे पन को ढँकते हुए उसकी तरफ देखा.

"ये लो.अपना वेड्डिंग गिफ्ट.",कहते हुए उसने 1 छ्होटा सा बॉक्स मेनका की तरफ बढ़ा दिया.

मेनका ने उसे खोला तो अंदर 1 बहुत खूबसूरत & कीमती डाइमंड ब्रेस्लेट था.ऐसा लगता था जैसे किसी ने मेनका से ही पसंद करवा के खरीदा हो.वो बहुत खुश हो गयी & अपना दर्द भूल गयी.उसे लगा कि अभी बेसब्री मे विश्वजीत ने ऐसा प्यार किया.

"वाउ!इट'स सो ब्यूटिफुल.आपको मेरी पसंद कैसे पता चली?",उसने ब्रेस्लेट अपने हाथ मे डालते हुए पूचछा.

"अरे भाई,मुझे तो तुमहरे गिफ्ट का ख़याल भी नही था",विश्वा ने उसकी बगल मे लेटते हुए जवाब दिया."वो तो मेरे कज़िन्स शादी के 1 दिन पहले मुझ से पुच्छने लगे कि मैने उनकी भाभी के लिए क्या गिफ्ट लिया तो मैने कह दिया कि कुच्छ नही.यार,मुझे लगा कि अब गिफ्ट क्या देना.पर पिताजी ने मेरी बात सुन ली.वो उसी वक़्त शहर गये ओर ये ला कर मुझे दिया.कहा कि बहू को अपनी तरफ से गिफ्ट करना.",इतना कह कर वो सोने लगा.

मेनका निराश हो गयी,उसने तो सोचा था कि उसका पति उसके लिए प्यार से तोहफा लाया है पर उसे तो तोहफे का ध्यान भी नही था.मेनका ने भी विश्वा के लिए गोल्ड चैन ली थी जो उसने सोते हुए विश्वा के गले मे डाल दी & खुद भी सो गयी.

उसी वक़्त महल के उसी उपरी मंज़िल जिसमे मेनका & विश्वा का कमरा था,के एक दूसरे हिस्से मे राजा यशवीर अपने पलंग पर लेट सोच रहे थे कि आज कितने दीनो बाद उनके महल मे फिर रौनक हुई."प्रभु,इसे बनाए रखना.",उन्होने मन ही मन भगवान से प्रार्थना की.

अब उनका ध्यान अपने बेटे-बहू पर गया.इस वक़्त दोनो एक-दूसरे मे खोए होंगे.उन्हे अपनी सुहागरात याद आ गयी.सरिता देवी के आती धार्मिक होने के कारण उन्हे चुदाई के लिए तैइय्यार करने मे उन्हे काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी थी.ज़बरदस्ती उन्हे पसंद नही थी,वरना जो 6'2" लंबा-चौड़ा इंसान आज 52 वर्ष की उम्र ने भी 45 से ज़्यादा का नही लगता था वो जवानी मे किसी औरत को काबू करने मे कितना वक़्त लेता!

अपनी सुहागरात याद करके उनके होठों पे मुस्कान आ गयी ओर अनायास ही वो अपने बेटे-अभू की सुहागरात के बारे मे सोचने लगे.उनका ध्यान मेनका की ओर गया.

"कितनी खूबसूरत है.विश्वा बहुत लकी है बस इस बात को वो खुद भी रीयलाइज़ कर ले.",फिर वो भी सो गये.

आइए चलते हैं हम अब राजपुरा के 1 दूसरे कोने मे.वाहा 1 बड़ी कोठी अंधेरे मे डूबी है.लेकिन उपरी मंज़िल के 1 कमरे से कुच्छ आवाज़ें आ रही हैं.देखते हैं कौन है वाहा.

उस कमरे के अंदर 1 काला ,भद्दा & थोड़ा मोटा आदमी नगा बिस्तर पर बैठा है.उसके सर के काफ़ी बाल उड़ गये हैं & चेहरे पर दाग भी है.मक्कारी और क्रूरता उसकी आँखो मे सॉफ झलकती है.यही है जब्बार जिसका बस 1 मक़सद है-राजा साहब की बर्बादी.

वो शराब पी रहा है & एक बला की सुंदर नंगी लड़की उसके लंड को अपनी चूचियों के बीच रगड़ रही है.वो लंड रगड़ते-2 बीच-2 मे झुक कर उसे अपने पतले गुलाबी होठों से चूस भी लेती है.दूर से देखने से लगता है जैसे कि एक राक्षस & 1 परी जिस्मों का खेल खेल रहे हैं.

अचानक जब्बार ने अपना ग्लास बगल की तिपाई पर रखा और उस खूबसूरत लड़की को उसके बालों से पकड़ कर खीचा & उसे बिस्तर पर पटक दिया.

"औ..छ्ह",वो कराही पर बिना किसी परवाह के जब्बार ने उसकी टांगे फैलाई & अपना मोटा लंड उसकी चूत मे पेल दिया.

"आ...आहह......हा...ईईईईईई......रा....आमम्म्ममम...",वो चिल्लाई.

जब्बार ने बहुत बेरहमी से उसे चोदना शुरू कर दिया.उस लड़की के चेहरे पर दर्द & मज़े के मिले-जुले भाव थे.उसे भी इस जुंगलिपने मे मज़ा आ रहा था 7 वो नीचे से अपनी कमर हिल-2 कर जब्बार का पूरा साथ दे रही थी.थोड़ी ही देर मे उसने अपनी बाहें जब्बार की पीठ पर & सुडोल टाँगें उसकी कमर के गिर्द लपेट दी & चिल्लाने लगी,"हा.....आई....से....हीईीईई.....ज़ो...र्र.... से ...कर....ते...रहो!"

"आ..हह...एयेए...हह!"

जब्बार उसकी चूचियो को काटने & चूसने लगा & अपने धक्कों की स्पीड और बढ़ा दी.थोड़ी ही देर मे वो लड़कीजद गयी,"ऊऊऊओ.....एयेए....हह....!"

और साथ-साथ जब्बार भी.

उसकी चूत मे से लंड निकाल कर जब्बार बिस्तर से उतरा & तिपाई पे रखे ग्लास मे शराब डालने लगा.उस लड़की ने अपना बाया हाथ बढ़ा कर जब्बार के सिकुदे हुए लॅंड & बॉल्स को पकड़ किया & मसालने लगी,"ज़ालिम तो तू बहुत है पर आज कुच्छ ज़्यादा ही हैवानियत दिखा रहा था.वजह?"

ग्लास खाली करके जब्बार ने जवाब दिया,"मुझे उंगली कर रही है ना,मलिका."

" साली,ये ले.",कहते हुए उसने अपना अपने ही वीर्य & मलिका के रस भीगा लंड फिर से मालिका के मुँह मे घुसा दिया.अपने मोटे हाथों से उसे बालों से पकड़ कर उसका सिर उपर किया और उसके मुँह को ही चोदने लगा,"राजा के यहा खुशी मने & मैं यहा संत बना रहूं..हैं!"

जवाब मे मलिका ने हाथों से उसकी कमर को पकड़ा & अपनी दो उंगलियाँ जब्बार की गांद मे घुसा दी.वो चिहुका लेकिन उसने अपनी रखैल का मुँह चोदना नही छ्चोड़ा.

मलिका उसकी रखैल थी.उसके ही जैसी निर्दयी & ज़ालिम.भगवान जितनी खूबसूरती उसे बक्शी थी उतनी ही कम उसके दिल मे दया & प्यार भरा था.

इन ज़ालिमों को इनके जुंगलिपने पे छ्चोड़ हम आगे बढ़ते हैं आने वाली सुबह की ओर जब विषजीत अपनी दुल्हन को लेकर हनिमून के लिए स्विट्ज़र्लॅंड को जाने वाला है.

सुबह सूरज की रोशनी चेहरे पर पड़ने से मेनका की आँख खुली.विश्वजीत कमरे मे नहीं था & वो पलंग पर अकेली नंगी पड़ी थी.वो उठकर बाथरूम मे आ गयी.नौकरानियों ने कल ही उसका सारा समान उसकी ज़रूरत के हिसाब से उसको रूम मे अरेंज कर दिया था.

बाथरूम मे घुसते ही वो चौंक पड़ी-आदम कद शीशे मे अपने अक्स को देख कर..उसे लगा कि कोई और खड़ा है पर जब रीयलाइज़ किया कि ये तो उसी का अक्स है तो हंस पड़ी.वो शीशे मे अपने नंगे बदन को निहारने लगी........अपना परियो जैसा खूबसूरत चेहरा,कमर तक लहराते घने,काले बाल...मांसल बाहें,लंबी सुरहिदार गर्दन...उसके 36 साइज़ के बूब्स बिना ब्रा के भी बिल्कुल टाइट और सीधे तने हुए थे..उसे खुद भी हैरत होती थी कि इतने बड़े साइज़ के होने के बावजूद उसकी चूचिया ऐसी कसी थी ज़रा भी नही झूलती थी...ब्रा की तो जैसे उन्हे ज़रूरत ही नही थी....उसने धीरे से उन्हे सहलाया और अपने हल्के गुलाबी रंग के निपल्स को हल्का सा मसला..अब उसके हाथ अपनी सपाट पेट पर गये जिसके बीच मे उसकी गोल,गहरी नाभि चमक रही थी .अब उसने अपना बदन घुमा कर अपनी मखमली पीठ का मुआयना किया,नीचे अपनी 26 इंच की कमर को देखा & फिर अपनी मस्त 34 साइज़ की गांद को निहारा जो की उसकी चूचियो की तरह ही बिल्कुल पुष्ट & कसी थी.उसकी मांसल ,भारी जांघे & उसके सुडोल टाँगें तो ऐसे चमक रही थी जैसे संगमरमर की बनी हो.

उसे अपनी सुंदरता पर थोड़ा गुरूर हो आया पर उसी वक़्त उसकी नज़र उसकी छातियो पर बने विश्वजीत के दांतो के निशान पर पड़ी & उसे कल की रात याद आ गयी & 1 परच्छाई सी उसके चेहरे पर से गुज़र गयी-उसकी छातियो को देख कर ऐसा लगता था जैसे चाँद पे दाग पड़ा हो...फ़र्क बस इतना था कि यहा 2-2 चाँद थे.

वो एक गहरी सांस भर के पानी भरे बाथ-टब मे बैठ गयी.उसके हाथ अपनी जांघों पर से होते हुए उसकी झांतों भरी चूत से टकराए & उसे रात को विश्वा की कही बात याद आ गयी.उसने हाथ बढ़ा कर बगल के शेल्फ से हेर-रिमूविंग क्रीम निकाली & अपनी झाँटें सॉफ करने लगी.

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बेटे-बहू को हनिमून के लिए विदा करके राजा यशवीर अपने ऑफीस पहुचे.उनकी 15 मिल्स तो राजपुरा के अंदर & आसपास के इलाक़े मे फैली थी पर राजपुरा के उत्तरी हिस्से मे 1 ओर उनकी 6 मिल्स का 1 बहुत बड़ा कॉंप्लेक्स था(उनका महल राजपुरा के पूर्वी बोर्डर्पे था).इसी के अंदर उन्होने मिल्स मे काम करने वाले उनके स्टाफ मेंबर्ज़ के लिए रेसिडेन्षियल कॉंप्लेक्स,हॉस्पिटल & स्टाफ के बच्चों के लिए स्कूल बनवाया था.साथ ही यहा उनके बिज़्नेस का सेंट्रल ऑफीस भी था जहा से राजा साहब अपने कारोबार को चलाते थे.

ऑफीस मे अपने चेंबर मे बैठते ही उनके राजकुल मिल्स ग्रूप के CMड सेशाद्री उनके पास सारी रिपोर्ट्स ले कर आ गये.सेशाद्री उनका बहुत वफ़ादार एंप्लायी था & राजा साहब उसके बिना बिज़्नेस चलाना तो सोच भी नही सकते थे.

"नमस्कार,सेशाद्री साहब.आइए बैठिए."

"कुंवर साहब & कुँवरनी साहिबा रवाना हो गये,राजा साहब?'

"जी हां,सेशाद्री जी.उपरवाले की कृपा & आप सबकी शुभकामनाओं से शादी ठीक तरह से निपट गयी."

"हम तो हुमेशा आपका शुभ ही चाहेंगे सर.",सेशाद्री नेउनकी तरफ लॅपटॉप घूमाते हुए कहा.

"वो जर्मन कंपनी जिसे हम अपनी शुगर मिल्स मे पार्ट्नर बनाना चाहते हैं,उनके साथ 4थ राउंड की मीटिंग कैसी रही?"

"बहुत बढ़िया सर.पेपर मिल्स के लिए 1 अमेरिकन कंपनी से भी बात की है.जैसा आप चाहते हैं हुमारी ग्रूप कॉस. मे फॉरिन पार्ट्नर्स लेकर हम अपने प्रॉडक्ट्स का एक्सपोर्ट तो आसान कर ही लेंगे,साथ-2 हुमारे ग्रूप मे भी कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर तैयार हो जाएगा."

"हा,हम चाहते हैं कि हुमारा ग्रूप आगे भी 1 वेल-आय्ल्ड मशीन की तरह चले & आपके जैसे क्वालिफाइड लोग ही हुमेशा इसकी बागडोर संभाले रहे."

"पर राजा साहब,आपको डर नही लगता कि आपके परिवार का कंट्रोल ख़तम हो गया तो.."

"..अगर ऐसा होता है उसका मतलब है कि हुमारे परिवार मे किसी मे को. चलाने की काबिलियत नही है.ऐसे मे उन्हे पैसों से कॉमपेनसेट किया जाएगा ओर कंपनी. को सो कॉल्ड बाहर के लोग सुचारू रूप से चलाते रहेंगे.",राजा साहब ने उनकी बात बीच मे ही काटते हुए जवाब दिया.

"सेशाद्री साहब,क्या आप आउटसाइडर हैं.आपका हुमारा खून का रिश्ता नही है पर आपने तो हमसे भी ज़्यादा इस ग्रूप की सेवा की है."

"सर,प्लीज़ डॉन'ट एंबरस्स मी."

"सेशाद्री साहब,हम तो आपकी तारीफ करते रहेंगे,आप ही तारीफ पर फूलना सीख जाए!"

कह कर दोनो हंस पड़े.

"अच्छा,वो अमेरिकन कंपनी भरोसे की तो है?"

एस,सर..जबसे जब्बार वाला केस हुआ है मैं इस मामले मे डबल सावधान हो गया हूँ."

जब तक ये दोनो और बात करते है मैं आपको "जब्बार वाले केस" से रूबरू करवा दू.
जब से राजा साहब ने अपनी कंपनियो.का कॉर्पोरेटिसेशन करना प्लान किया उनके पास पार्ट्नर्स बनाने के लिए कई लोग आने लगे.बस यही जब्बार को उनके किले मे सेंध लगाने का मौका मिल गया.उसने कुच्छ लोगों को बहुत अट्रॅक्टिव ऑफर के साथ राजा साहेब के पास भेजा.बड़ी चालाकी से उसने अपना नाम सामने ना आने दिया पर राजकुल ग्रूप की खुसकिस्मती की उसके भेजे प्यादों मे से 1 के मुँह से नशे मे कहीं उसका नाम निकल गया & राजा साहब सचेत हो गये.

अब तो जर्मन कंपनी. & अमेरिकन कंपनी. से बातें ऑलमोस्ट फाइनल हो गयी थी.

आइए वापस चले दोनो के पास.

"जब्बार तो लगता है सबक सीख कर शांत हो गया सर.."

"नही,सेशाद्री साहब दुश्मन को कभी कम नही आँकना चाहिए & खास कर जब वो जब्बार जैसा है.उसकी ये चुप्पी तो हमे तूफान से पहले की खामोशी लग रही है.बहुत सावधान रहना होगा हम सब्को."

यशवीर सिंग ने इससे सही बात शायद कभी कही हो.

रात हो चली है.अब हम राजपुरा की उस बड़ी आलीशान मगर मनहूस लगने वाली कोठी मे चलते हैं.

मलिका बड़े से पलंग पर बिल्कुल नगी होकर अपनी घोड़ी बनी हुई थी & अपनी चौड़ी,मखमली गांद जब्बार की तरफ करके हवा मे घुमा रही थी.उसने गर्दन घुमाई & जब्बार की तरफ देख कर अपनी जीभ अपने गुलाबी होठों पर फिराते हुए 1 हाथ से अपनी बड़ी-2 चूचियो को मसल्ने लगी.जब्बार उसे ऐसे देख रहा था जैसे भेड़िया अपने शिकार को.

वो केवल पाजामे मे था.उसने उसे उतार फेंका & पलंग पर चढ़ कर मालिका के पीछे पोज़िशन ले ली.मलिका अब अपनी गांद उसके लंड से टकराने लगी.जब्बार ने 1 हाथ उसकी कमर पकड़ी & दूसरे से अपना काला मोटा लंड पकड़ कर उसकी गांद के छेद मे अपना सूपड़ा घुसा दिया.

"ऊऊ...ययइईई!",मालिका आगे को हो गयी पर जब्बार ने उसकी कमर पर पकड़ & मज़बूत कर दी और अगले झटके मे पूरे का पूरा लंड अंदर पेल दिया.

"आ....आहह....मार......गा....ईए!"

जब्बार अब ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा & बीच-2 मे मलिका के गोरे चूतदों पर थप्पड़ लगाने लगा.

"ऊओ....ऊओवववववव!",हर थप्पड़ पर मलिका चीखती थी पर सॉफ ज़ाहिर था कि उसका मज़ा और बढ़ रहा था.वो राक्षस वैसे ही उसकी गांद चोद्ता रहा & 1 हाथ से उसकी चूचिया मसल्ने लगा.फिर थप्पड़ मारना बंद करके उसने उसकी चूत के दाने को दूसरे हाथ से रगड़ना शुरू कर दिया.

मालिका पागल हो गयी,"हा....अन्णन्न्...और ज़ोर ....से..फ...आ...आद्दद्ड....दे...मे...री...गा...आन्न्न्ड्ड...आई..से...ही चूऊऊऊद्द्द्द्द्द्दद्ड,साआआआअ.....ले!"

सुनते ही जब्बार ने छाती मसलना छ्चोड़ उसके लंबे बालों को घोड़ी की लगाम की तरह पकड़ कर खीच दिया..मालिका का चेहरा उपर को हो गया & उसपे दर्द की रेखाएँ दिखने लगी पर मलिका अब पूरी तरह से गरम हो गयी थी,"चूओत...मे....उन..ग्ली ..कर...नाआ!"

जब्बार ने उसकी चूत मे 3 उंगलिया घुसेड कर बेदर्दी से रगड़ना शुरू कर दिया.वो भी झड़ने के करीब था,धक्कों की स्पीड ओर बढ़ गयी मालिका भी अपनी कमर हिला कर उसकी ताल से ताल मिलने लगी..चूत मे उंगलियों की रगड़ ने भी रफ़्तार पकड़ ली की तभी..."ऊओ....ईईई मा..आआअन्न्‍ननणणन्!",कहते हुए मलिका झाड़ गयी,उसकी चूत ने पानी छ्चोड़ दिया & वो निढाल हो कर आगे गिर गयी....जब्बार ने भी 5-6 धक्कों के बाद अपने पानी से उसकी गांद को भर दिया & मलिका की पीठ पर गिर कर हाँफने लगा.

तभी बगल की तिपाई पे रखा उसका मोबाइल जोकि वाइब्रटर मोड पर था, हिलने लगा.जब्बार ने वैसे ही मालिका के उपर पड़े-2 उसे उठा कर नंबर. देखा & फोन काट दिया.उसके बाद झटके से उसने अपना सिकुदा लंड मालिका की गॅंड से निकाला & अपना पाजामा पहन कर भागता हुआ कोठी के पीछे आया & वाहा बने लॉन को पार किया & पीछे बने छ्होटे से दरवाज़े को बस इतना खोला कि बाहर खड़ा काले शॉल मे लिपटा आदमी अंदर आ सके.जैसे ही वो घुसा,जब्बार उसका हाथ पकड़ कर उसे कोठी के अंदर ले आया.कोठी के सारे दरवाज़े बंद & खिड़कियाँ पर्दे से ढाकी हैं,उसने सुनिश्चित किया & उस आदमी को लेकर हॉल मे आकर बैठ गया.


"तुम्हे यहा आते किसी ने देखा तो नही?",जब्बार ने उसकी तरफ पानी की बॉटल बढ़ाई.

"नही",शॉल उतारते हुए & बॉटल खोलते हुए उसने जवाब दिया.

वो 1 6फ्ट से कुछ लंबा गोरा,तगड़ा इंसान था.उसके कंधे तक लंबे बाल & चेहरे पर घनी दाढ़ी थी.जब्बार 1 सोफे पर बैठ गया & वो इंसान उसके सामने वाले सोफे पर.

तभी मालिका हॉल मे आई.उसके बाल वैसे ही अस्त-व्यस्त थे उसने 1 ब्लॅक माइक्रो-मिनी स्कर्ट ओर उपर 1 बहुत टाइट वाइट गॅंजी पहनी थी जिसके नीचे ब्रा नही थी & चुदाई के वक़्त से कड़ी हुई उसकी घुंडिया उस गॅंजी को फाड़ कर बाहर आने को बेताब लग रही थी.गॅंजी बेपरवाही से पहनी गयी थी और उसका पेट & नाभि सॉफ दिख रहे थे.गॅंजी के गले से उसकी बड़ी चूचियो का काफ़ी हिस्सा दिख रहा था & जब वो चलती थी तो बड़े मादक ढंग से हिलता था.उसकी हालत देखकर कोई भी कह देता कि वो 1 रंडी है & अभी चुद कर आ रही है.

वो आकर जब्बार के सोफे के हटते पर बैठ गयी & उस अजनबी को सर से पैर से तक 1 बाज़ारु औरत की तरह देखने लगी.बैठते ही उसकी स्कर्ट पूरी उपर हो गयी & उसकी गांद दिखने लगी बस चूत ही धकि रही.

"ये कल्लन है & ये मेरी रखैल मलिका.",जब्बार ने दोनो का परिचय कराया.जवाब मे कल्लन ने सिर्फ़ सिर हिलाया.मलिका उसे वैसे ही चालू निगाहों से देखती रही.

"इसकी रांड़ छाप हरकतों पर मत जाना.इसका दिमाग़ हुमेशा अलर्ट रहता है.",जब्बार ने कल्लन को कहा.

मलिका ने हँसते हुए अपने दाँतों से जब्बार के कान पे काटने लगी.

"हुउँ!बस,अब काम का टाइम आ गया है.",जब्बार ने उसे रोकते हुए कहा.

फिर जब्बार दोनो को अपना प्लान सुमझने लगा.

उसके चुप होते ही मलिका ने उसकी तरफ तारीफ भरी नज़रों से देखा,"हरामीपन मे तेरा जवाब नही!इस बार तो राजा गया."


"हा,पर 1 बात हम तीनो अच्छी तरह समझ ले.कल्लन,तुम हुमलोगों से कभी नही मिलोगे & इस गाओं मे कभी नज़र आओगे.",जब्बार उठ कर अंदर गया & 2 नये मोबाइल लेकर आया.1 उसने कल्लन को दिया,"इन दोनो मोबाइल्स बस 1 दूसरे का नंबर.सेव्ड है.जब भी ज़रूरत हो हम इसी पर बात करेंगे.प्लान कामयाब करने के लिए हुमारी सावधानी बहुत ज़रूरी है."

"और हां तू भी सुन ले मलिका,मैं जानता हूँ इस को देख कर तेरी चूत लार टपका रही है पर जब तक हम अपने मक़सद मे कामयाब नही हो जाते तुझे इसे कंट्रोल मे रखना होगा",वो उसकी चूत थपथपाते हुए बोला.

कल्लन पे मालिका की जिस्म की नुमाइश का कोई असर नही हुआ या यू कहें कि उसने अपने भाव बड़ी सफाई से च्छूपा लिए थे,'क्या गॅरेंटी है जब्बार कि काम ख़तम होने के बाद तुम मुझे दूध से मक्खी की तरह नही निकाल फेंकोगे?"

"इस गुनाह मे हम तीनो बराबर के भागीदार रहेंगे ,कल्लन.हम तीनो 1 दूसरे के राज़दार हैं & यही हम तीनो की सलामती की गॅरेंटी है."

तब तक मलिका अंदर से विस्की ले आई थी.उसने 3 पेग बनाए,1 खुद लिया & बाकी 2 दोनो मर्दों को दिया,"चियर्स 2 और सक्सेस."

ग्लास खाली करते ही कल्लन ने शॉल वापस लपेटी और उसी रास्ते वापस लौट गया.

दरवाज़ा बूँद करके जब्बार अंदर आया तो देखा की मलिका सोफे पर फिर से नंगी पड़ी अपनी चूत मे उंगली कर रही है & अपनी चूचिया दबा रही है.

"साली छिनाल,हुमेशा गरम रही है!",जब्बार मन ही मन बड़बड़ाया & अपना पाजामा उतार कर सोफे की तरफ बढ़ गया.
............ ..
प्लेन के बिज़्नेस क्लास की अपनी सीट को मेनका ने बटन दबा कर फुल्ली रिक्लाइन कर दिया & लेट गयी.एर-होस्टेस्स ने मुस्कुराते हुए उसे कंबल ओढ़ाया & "गुड नाइट" कह कर,लाइट ऑफ की & चली गयी.

मेनका आज स्विट्ज़र्लॅंड से अपना हनिमून मना कर लौट रही थी.पीछे की सीट पर विश्वजीत ऑलरेडी सो चुका थापर मेनका की आँखों से नींद अभी दूर थी.उसने खिड़की का फ्लॅप सरकया & बाहर देखा की चाँद की रोशनी बादलों को नहला रही थी...लग रहा था कि प्लेन बर्फ़ीले पहाड़ों के उपर चल रहा है.पहाड़ों के ध्यान से उसे अपने हनिमून का पहला दिन याद आ गया.

विश्वा & वो ज़ुरी के पास 1 पास अपने शेलेट(कॉटेज मे पहुचे)..मेनका ने 1 टॉप & फुल-लेंग्थ फ्लोयिंग स्कर्ट पहना हुआ था.वो शेलेट के अंदर आई जब अपने बेडरूम की खिड़की से परदा हटाया तो कुदरत की खूबसूरती का अद्भुत नज़ारा देख कर उसका मुँह खुला का खुला रह गया.सामने ही आल्प्स रेंज के पहाड़ दिख रहे थे जोकि सूरज की रोशनी मे चमक रहे थे & पहाड़ों के नीचे दूर-2 तक फैले हरी मखमली घास के मैदान.

तभी पीछे से उसे विश्वा ने अपनी बाहों मे जाकड़ लिया &उसकी गर्दन पे किस करने लगा.

"छ्चोड़िए ना!देखिए कितनी सुंदर जगह है",मेनका कसमसाते हुए बोली.

"ह्म्म.",जवाब मे विश्वा ने उसकी स्कर्ट उठा दी,उसकी पॅंटी 1 तरफ खिसकाई & अपना पहले से निकाला लंड उसकी चूत मे घुसने लगा.

"प्लीज़,अभी नही,विश्वा",मेनका ने अलग होने की कोशिश करते हुए कहा.

पर विश्वा ने अनसुना करते हुए अपना हाथ उसके टॉप मे घुसा दिया & ब्रा के अंदर हाथ डाल कर उसकी बड़ी-2 चूचिया मसल्ने लगा,उसने अपना लंड पूरा का पूरा मेनका की चूत मे घुसा दिया & तेज़ी से धक्के लगाने लगा.मेनका ने सहारे के लिए आगे झुक कर खिड़की के सिल को पकड़ लिया.उसे इस चुदाई मे कोई मज़ा नही आ रहा था बल्किस्तेमाल किए जाने का एहसास हो रहा था जैसे की वो 1 बाज़ारु औरत हो & विश्वा उसका ग्राहक.

थोड़ी ही देर मे विश्वा उसके अंदर झाड़ गया,उस से अलग हुया & बोला,"तैय्यार हो जाओ.घूमने चलते हैं..."

मेनका ने फिर आँखें बंद करके नींद की बाहों मे जाना चाहा पर फिर उसे वो वाक़या याद आया जिसने उसके दिल मे विश्वा के लिए इज़्ज़त ओर भी ज़्यादा कम कर दी.

वो शेलेट के कार्पेट पे नंगी पड़ी थी.बगल मे फाइयर्प्लेस मे आग जल रही थी पर उसकी बेपर्दा जवानी की भदक्ति चमक के आगे आग भी बेनूर लग रही थी..विश्वा भी नंगा था ओर उसकी चूत मे अपनी जीभ डाल कर चाट रहा था.मेनका पागल हो रही थी..उसे बहुत अच्छा लगता था जब उसका पति उसकी चूत पे अपने मुँह से मेहरबान होता था.

पर हर बार की तरह मेनका का मन भरने से पहले ही विश्वा ने अपने होठ उसकी चूत से अलग कर दिया.मेनका का सिर 2 कुशान्स पर था,जिसके कारण उसका उपरी बदन थोडा उठा हुआ था.उसने आँखें खोली तो देखा कि विश्वा अपना लंड पकड़ कर हिला रहा है &उसकी तरफ देख रहा है.उसने गहरी साँस ली & उसका इशारा समझते हुए अपनी टांगे ओर फैला दी.

पर वो चौंक गई जब विश्वा अपना लंड उसकी चूत मे घुसाने के बजाय उसे सीने के दोनो ओर पैर करके बैठ गया ओर अपना लंड उसके मुँह के सामने हिलाने लगा,"इसे लो."

मेनका ने उसके लंड को अपने हान्थो मे पकड़ा ओर हिलाने लगी.विश्वा अक्सर उसे अपना लंड पकड़ने को कहता था पर उस वक़्त वो पीठ के बल लेटा होता था.आज की तरह उसने कभी नही किया था.

"हाथ मे नही मुँह मे लो."

"क्या?!!",मेनका ने पुचछा.

"हाँ,मुँह मे लो",कहकर उसने अपना लंड उसके हाथों से लिया & उसके बंद होठों पर से छुआने लगा.

"नही,मैं ऐसा नही करूँगी",मेनका ने उसे हल्के से धकेला & करवट लेकर उसके नीचे से निकल गयी.

"क्यू?"

"मुझे पसंद नही बस."

"अरे,क्या पसंद नही?"

"मुझे घिन आती है.मैं ऐसे नही करूँगी."

"जब मैं तुम्हारी चूत चाटता हूँ तब तो तुम्हे बड़ा मज़ा आता है &जब मैं वोही तुमसे चाहता हूँ तो तुम्हे घिन आती है!"

"देखिए,मैं आपसे बहस नही करूँगी.आप जो चाहते हैं वो मैं कभी नही कर सकती बस!"

"ठीक है,तो सुन लो आज के बाद मैं भी कभी तुम्हारी चूत नही चाटूँगा."कह कर विश्वा ने उसे लिटाया & उसके उपर आकर अपना लंड उसकी चूत मे पेल दिया& कुच्छ ज़्यादा ही तेज़ धक्के लगाने लगा जैसे उसे जानकार तकलीफ़ पहुँचना चाहता हो.मेनका ने अफ तक नही की ओर उसके झड़ने का इंतेज़ार करने लगी.

अभी भी इंडिया पहुँचने मे बाबाहुत वक़्त था पर मेनका अभी तक नही सो पाई थी.उस दिन के बाद विश्वा ने सच मे उसकी चूत पे अपने होठों को नही लगाया.
मेनका अब आगेके बारे मे सोचने लगी.राजपुरा पहुँचने के बाद 2 दिन वाहा रहना था & फिर उसे मायके जाना था.अपने माता-पिता का ख़याल आते ही उसके चेहरे पे मुस्कान आ गयी& वो उनकेलिए खरीदे गये तॉहफ़ों के बारे मे सोचने लगी & थोड़ी ही देर मे सो गयी.

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शहर के उस घटिया से होटेल के उस रूम मे वो आदमी पलंग पर नंगा पड़ा था.उसके दोनो हाथ बेडपॉस्ट्स से सिल्क स्कार्व्स से बँधे थे और उसके सामने 1 खूबसूरत, सेक्सी लड़की धीरे-2 अपने कपड़े उतार रही थी.थोड़ी ही देर मे वो पूरी नंगी हो गयी &उसकी तरफ बोझिल पलकों से देख कर अपने गुलाबी होठों पे जीभ फेरी & 2 कदम आगे बढ़ कर अपना 1 पैर पलंग पर रख दिया & पैर के अंगूठे के नाख़ून से उस आदमी के तलवे गुदगुदाने लगी,फिर उसने अपनी दाए हाथ की उंगलिया अपने चूत मे डाल दी & बाए हाथ से अपनी भारी छातियो को मसल्ने लगी.

वो आदमी जोश से पागल हो गया & अपने हाथ च्छुदाने की कोशिश करने लगा.उसका लंड पूरा तन चुका था.पर उसकी हालत से बेपरवाह वो लड़की अपने बदन से खेलते रही,"ऊऊहह....आआ...ह..हह.....बत्रा साहब,ऐसे ही आप मेरी चूचिया दबाना चाहते हैं ना?"उसने अपने बूब्स को बेरहमी से मसालते हुए पुचछा.

"हा..हा..मलिका मेरी जान मेरे हाथ तो खोलो."

"क्यू?बर्दाश्त नही हो रहा?",मलिका वैसे ही अपने जिस्म से खेलती हुई & उसे और तड़पाते हुए बोली.

"नही,,नही!!!!!!!!!!!!प्लीज़ खोलो मलिका."

पर मलिका ने तो उसे और तड़पाना था.वो उसके बदन के दोनो तरफ घुटने रख कर उसके लंड के ठीक उपर अपनी चूत लहराने लगी.बत्रा अपनी गंद उठा कर अपने लंड को उसमे घुसाने की कोशिश करने लगा.पर मलिका हंसते और उपर उठ गयी & अपने हाथ से उसे फिर वापस बिस्तर पर सुला दिया.फिर अपने हाथ उसके सीने पे रखे & यूँ बैठने लगी जैसे उसके लंड को लेने वाली हो.बत्रा मुस्कुराने लगा...मलिका की चूत उसके लंड के सूपदे से सटी..बत्रा को लगा कि अब उसकी मुराद पूरी हुई & ये कसी चूत अब उसके लंड को निगल लेगिपर उसके सपने को तोड़ते हुए मलिका फिर उठ गयी.]

बत्रा रुवासा हो गया,"प्लीज़ मलिका और मत तड़पाव..प्लीज़!!!!प्लीज़!!"

मलिका फिर बेदर्दी से हँसी & इस बार उसके लंड पे बैठ गयी,जैसे ही पूरा लंड उसकी चूत के अंदर गया बत्रा नीचे से ज़ोर-2 से गांद हिलाने लगा.मलिका ऩेफीर उसे मज़बूती से अपने बदन से दबा दिया & बहुत ही धीरे-2अपनी गंद हिला कर उसे चोदने लगी.

बत्रा अब बिल्कुल पागल हो गया.जोश के मारे उसका बुरा हाल था & उसने फिर नीचे से अपनी गंद ज़ोर-2 से हिला कर धक्के मारने लगा.मलिका पागलों की तरह हँसने लगी & थोड़ी ही देर मे बत्रा झाड़ गया.

तब मालिका ने वैसे ही उसके उपर बैठे-2 उसके हाथ खोले.हाथ खुलते ही बत्रा ने उसे पकड़ कर नीचे गिरा दिया &फिर उसके उपर चढ़ गया.उसका सिकुदा लंड अभी भी मालिका की चूत मे ही था.

"साली,तू बहुत तड़पति है...बहुत मज़ा आता है ने तुझे इसमे...ये ले..ये ले!",कह के वो अपने सिकुदे लंड से ही धक्के लगाने लगा.थोड़ी ही देर मे लंड फिर तन गया & बत्रा के धक्कों मे भी ओर तेज़ी आ गयी.

वो बहुत बेदर्दी से धक्के मार रहा था पर मलिका वैसे ही पागलों की तरह हँसती रही.थोड़ी ही देर मे उसके बदन ने झटके खाए & वो झाड़ कर मलिका के उपर ही ढेर हो गया.

"अब थोड़ी काम की बातें हो जाए,बत्रा साहब?.मलिका ने उसके कन मे कहा.

बत्रा राजकुल ग्रूप मे मॅनेजर था.सेशाद्री को उस पर बहुत भरोसा था & बत्रा आदमी था भी भरोसे के लायक पर फिर 1 दिन उसकी मुलाकात मलिका से हुई & उस दिन सेओ राजा साहेब के बिज़्नेस के अंदर जब्बार का भेड़िया बन गया.

बत्रा को जैसे सेक्स करना पसंद था,उसकी बीवी को वो बिल्कुल भी अच्छा नही लगता था.बत्रा रफ सेक्स& सडो-मासकिज़म का शौकीन था.दर्द के साथ सेक्स ही उसे पूरी तरह संतुष्ट कर पाता था.किसी तरह जब्बार को उसकी ये कमज़ोरी पता चल गयी &मलिका के ज़रिए उसने उसे अपना जासूस बना लिया.मज़े की बात ये थी, बत्रा ये समझता था कि वो राजा साहब के बिज़्नेस राइवल पॅंट ग्रूप के लिए काम करती थी.इस तरह से जब कभी पोल खुलती भी तो नुकसान केवल बत्रा का था.जब्बार का नाम भी सामने नही आता & मलिका-मलिका को तो किसी चीज़ की परवाह नही थी सिवाय इसके कि उसके डेबिट & क्रेडिट कार्ड हुमेशा काम करते रहें & उसके जिस्म की आग रोज़ बुझती रहे.

जब्बार टी-शर्ट & शॉर्ट्स मे अपनी कोठी के किचन मे खड़ा फ्रिड्ज से बॉटल निकाल कर पानी पी रहा था जब मलिका हॉल मे दाखिल हुई.उसने अपना हॅंड बॅग 1 तरफ फेका & जब्बार को हॉल से किचन मे खुलते दरवाज़े से देखते हुए बेडरूम मे घुस गयी.जब्बार बॉटल लेकर हॉल मे आया & बड़े सोफे पर बैठ गया.

"क्या पता चला?"

सुनकर मलिका बेडरूम से हॉल मे खुलने वाले दरवाज़े पे आकर खड़ी हुई,"यही कि बत्रा का लंड तुमसे बड़ा है",हंसकर अपना टॉप उतारते हुए अंदर चली गयी.

"उंगली मत कर."

"क्यू ना करू?सिर्फ़ तू ही कर सकता है.",वो वापस दरवाज़े पे आई & अपने हाथ पीछे ले जा कर अपने ब्रा के हुक्स खोल कर उसे अपने बदन से अलग कर दिया,उसकी भारी चूचिया थरथरती हुई आज़ाद हो गयी.

"राजा की पोज़िशन दिन पर दिन मज़बूत हो रही है & तू बस यहा जासूसी ही करता रह!पता है राजकुल ग्रूप का 49% शेर 1 जर्मन कंपनी. खरीद रही है.बत्रा कह रहा था कि राजकुल ग्रूप की टोटल वॅल्यू 200 करोड़ है,जर्मन कंपनी.से राजा को 98 करोड़ मिल रहे हैं.अभी ऑडिटिंग वगेरह चल रही है,2-3 महीने मे डील हो जाएगी.",उसने अपनी स्किन-टाइट जीन्स & पॅंटी1 साथ उतरी & अपनी मस्त गांद मटकाते हुए वापस रूम मे चली गयी.

"हा..हा...हा!इसका मतलब है कि राजकुल की असल वॅल्यू है 280 करोड़ रुपये.राजा को 30 करोड़ रुपये और मिले होंगे.",जब्बार हंसा.

"क्या?",मलिका 1 ओवरसाइज़ सफेद ट-शर्ट पहन कर आई,साफ पता चल रहा था कि उसके नीचे उसने कुछ नही पहना था.उसकी चूचियो की गोलाई & निपल्स के उभार & चौड़ी गांद के कटाव कपड़े मे से सॉफ झलक रहे था.उसने जब्बार के हाथ से बॉटल ली & उसकी गोद मे पैर रख कर सोफे पे लेट गयी & पानी पीने लगी.

"मलिका,ये बिज़्नेसमॅन जितना पैसा कमाते हैं,वो असल रकम कभी नही बताते.ये बॅलेन्स शीट,ऑडिटिंग सब होती है पर कुच्छ पैसा ये हमेशा अपने सीक्रेट अकाउंट्स मे रखते हैं.ये 200 करोड़ तो दुनिया के लिए है.डील से जो पैसा ग्रूप को मिलेगा,दिखाया जाएगा कि सारे पैसे एंप्लायीस के बोनस & मिल्स के अपग्रडेशन मे लग गये & 98 करोड़ मे से 4-5 करोड़ राजा को मिले.पर ग्रूप की वॅल्यू जान कर कम दिखाई जाएगी ताकि वो 30 करोड़ राजा को बिना किसी परेशानी के मिले जिन्हे वो कही विदेशी बॅंक मे च्छूपा देगा.और तो और तुझे पता है कि सालाना मुनाफ़ा भी हुमेशा थोड़ा कम दिखाया जाता है & वो च्छुपाई हुई रकम भी राजा के पेट मे जाती है"

"ठीक है पर अपने फ़ायडे की बात तो समझा मुझको.",कहते हुए मलिका ने अपने पैर से जब्बार के शॉर्ट्स को नीचे सरका दिया & वैसे लेते हुए ही अपने पैरों से उसके लंड को रगड़ने लगी.बॉटल को किनारे रखा,अपनी शर्ट उपर की & अपनी उंगलियों से अपने निपल्स रगड़ने लगी.

"राजपरिवार की बर्बादी ही मेरा सबसे बड़ा फाय्दा है.तुझे लगता है कि मैं हाथ पे हाथ धरे बैठा हूँ",जब्बार ने अपनी उंगलियाँ उसकी चूत मे घुसाते हुए कहा,"ये मेरा प्लान है,साली.मैं ऐसी चाल चलूँगा कि राजा यशवीर & उसका परिवार अपने हाथों अपनी जान लेगा & अपने बिज़्नेस की धज्जियाँ उड़ाएगा.",उसने मलिका के दाने को रगड़ते हुए कहा.

"ऊऊ...हह!पर तुझे तो 1 पैसा भी नही मिलेगा इसमे...एयेए...ययईईए.....बस राजा की बर्बादी होगी."

"कहा ना राजा की बर्बादी ही मेरा सबसे बड़ा फयडा है.तुझे क्या चिंता है मैं जानता हूँ छिनाल!परेशान मत हो तेरी भूख शांत करने लायक पैसे मेरे पास अभी भी हैं & हमेशा रहेंगे.बदले की आग मे खुद को भी राख करू ऐसा चूतिया नही हूँ मैं.,"मालिका की चूत पे चिकोटी काटते हुए उसके मुँह से निकल गया .

"ऊउउउउ...कचह!हा...हा...बदला!तो ये बात है,क्या हुआ था कुत्ते?राजा ने तेरी मा की गांद मार ली थी क्या?!!हा..हा..हा..एयाया.....यययययईईई!मलिका दर्द से चीख पड़ी.जब्बार ने बेरहमी से उसकी चूत नोच ली थी.

"हरमज़ड़ी,रंडी!आज के बाद मुझसे कभी मेरे बदले के बारे मे मत पुच्छना?ओर अगर बाहर किसी से भी कहा तो तुझे ऐसी मौत मारूँगा कि यमराज भी दहल जाएगा."उसने लेटी हुई मलिका के 2-3 झापड़ बी रसीद कर दिए.

"ठीक है दरिंदे.ये ले साले.",जवाब मे मालिका ने उसके आंडो को अपने पैरो तले कुचल दिया,"साला नमर्द मुझ पे हाथ उठाता है!"

"एयेए..हह!",जब्बार करहा,उसने मालिका की टाँगों को अपने आंडो से हटाया & उन्हे चौड़ी करके उसके उपर सवार हो गया & अपना लंड उसकी चूत पे रगड़ने लगा,"मुझसे बदतमीज़ी करती है,रांड़!",कह कर पागलों की तरह वो उसके बदन को नोचने लगा.

"मुझे नमर्द कहती है.ये ले!",थोड़ी देर मे लंड खड़ा हो गया & उसने उसे मलिका की चूत मे पेल दिया & ज़ोरदार धक्के मारने लगा.उसने अपने दाँत उसकी बड़ी,गोल चूची मे गढ़ा दिए.

मलिका पागलों की तरह हँसने लगी & अपनी टाँगें उसकी कमर पे लपेट दी & नीचे से अपनी कमर हिलाने लगी & फिर जब्बार के कंधे पे इतनी ज़ोर से काटा की उसके खून निकल आया.

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मेनका अपने मायके से वापस राजपुरा आ गयी थी.सवेरे उठ कर वो नीचे रसोई मे खानसमे से बात करने पहुचि.

"नमस्कार,कुँवरनी जी."

"नमस्कार,खानसमा साहेब.आज का मेनू डिसाइड कर ले."

"कुँवरनी जी,नाश्ते का हुक्म तो राजा साहेब ने कल रात आपके वापस आने के पहले ही दे दिया था.आप दिन के बाकी खाने का मेनू हमे हुक्म कर दें."

मेनका ने बाकी मेनू डिसाइड कर के जब नाश्ते का मेनू देखा तो उसे प्लेज़ेंट सर्प्राइज़ हुआ.उसके ससुर ने केवल उसकी पसंद की चीज़ें बनाने का हुक्म दिया था.तभी उसके दिमाग़ मे 1 ख़याल आया.

"खानसमा साहब,हमे पिताजी की पसंद-नापसंद के बारे मे तफ़सील से बताएँ & साथ-साथ ये भी कि मेडिकल रीज़न्स की वजह से तो उन्हे कोई परहेज़ तो नही करना पड़ता."

थोड़ी देर बाद मेनू रिवाइज़ किया गया.

नाश्ते के बाद दोनो बाप-बेटे ऑफीस चले गये & मेनका महल का सारा सिस्टम समझने लगी.हर काम के लिए नौकर-नौकरानी थे.उन्हे पता भी था कि उन्हे क्या करना है.शाम तक मेनका ने पूरा सिस्टम समझ लिया & पूरे स्टाफ को कुच्छ न्‍नई बातें समझा दी.

रात के खाने पे राजा साहब खुशी से उच्छल पड़े.केवल उनके पसंद की चीज़ें थी टेबल पर.

"खानसमा साहब,आज आप हम पर इतने मेहेरबान कैसे हो गये,भाई?"

"महाराज.ये सब हमने कुँवरनी साहिबा के कहने पे बनाया है."

"दुल्हन,आपको हुमारी पसंद के बारे मे कैसे पता चला?"

"जैसे आपको हुमारी पसंद के बारे मे.",मेनका ने जवाब दिया & दोनो हंस पड़े.

शाम के 7 बजे थे,अंधेर गहरा रहा था जब राजपुरा से निकल कर वो ग्रे कलर की लंदक्रुसेर ने 5 मिनट के बाद हाइवे छ्चोड़ दिया ओर 1 पतली सड़क पे चलने लगी & 15 मिनट बाद कुच्छ झोपड़ियों के पास पहुच कर रुक गयी.ड्राइवर साइड का शीशा 4 इंच नीचे हुआ & 1 50 का नोट बाहर निकला जिसे उस आदिवासी ने लपक के पकड़ लिया जो गाड़ी देख कर भागता हुआ आया था.बदले मे उसने 1 छ्होटी बॉटल गाड़ी के अंदर दे दी.

उसके बाद वो ग्रे कलर की, गहरे काले शीशों वाली लंदक्रुसेर वापस लौटने लगी.हाइवे से थोड़ा पहले कार रुक गयी.अंदर बैठे विश्वजीत ने बॉटल खोल ले अपने मुँह से लगा ली.सस्ती शराब जब हलक से नीचे उतरी तो उसे जलन महसूस हुई पर इसी जलन मे उसे सुकून मिलता था.

राजा यशवीर का बेटा,भावी राजा,अकूत दौलत का मलिक जो चाहे थे दुनिया की महँगी से महँगी शराब पी सकता था आदिवासियों द्वारा घर मे बनाई हुई 50 रुपये की शराब मे चैन पाता था.वाकाई इंसान भगवान की सबसे अजीबो-ग़रीब ईजाद है.

विश्वा को वो दिन याद आया जब वो अपने बड़े भाई के साथ घूमते हुए यहा आया था & उन्होने इन आदिवासियों से जुंगली खरगोश पकड़ना सीखा था.अपने गुज़रे हुए भाई की याद आते ही उसकी आँखो मे पानी आ गया.

"क्यू चले गये तुम भाई?क्यू.तुम गये और मैं यहा अकेला रह गया इन झंझटों के बीच मे.तुम जानते थे मुझे ये बिज़्नेस & राजाओं की तरह रहना कितना नापसंद था.फिर भी मुझे छ्चोड़ कर चले गये.",विश्वा बुदबुडाया & 1 घूँट और भरी.

"मर्यादा,शान....डिग्निटी!बस यही रह गया है मेरी लाइफ मे.चलो तो ख्याल रहे कि हम किस ख़ानदान के हैं,बात करो तो ध्यान रहे कि हुमारी मर्यादा क्या है....यहा तक की शादी भी करो तो ....हुन्ह."

विश्वा हुमेशा सोचता था कि यूधवीर राजा बनेगा & वो आराम से जैसे मर्ज़ी विदेश मे रह सकता था.शादी मे तो उसे विश्वास ही नही था.उसका मानना था कि जब तक जी करे साथ रहो & जिस दिन डिफरेन्सस हो अलग हो जाओ.शादी तो बस मर्द-औरत के ऐसे सिंपल रिश्ते को कॉंप्लिकेट करती थी.

उसने बॉटल ख़तम करके बाहर फेंकी की तभी 1 लंबा,गोरा छ्होटे-2 बालों वाला क्लीन शेवन इंसान उसके पास पहुचा,"सलाम,साब.."

उस अजनबी को देखते ही विश्वा के हाथ अपने कोट मे रखे पिस्टल पर चले गये.

"सलाम,साब.मेरा नाम विकी है.मुझे लगता है कि मेरे पास आपके काम की चीज़ है."

"दफ़ा हो जाओ.",कहकर विश्वा गाड़ी गियर मे डालने लगा.

"साहब,बस 1 बार मेरा समान देख लीजिए.कसम से मैं आपका दुश्मन नही बस 1 छ्होटा सा व्यापारी हू जिसे लगता है कि उसके माल के असल कदरदन आप ही है."

विश्वा ने बिना कुच्छ बोले गाड़ी रोकी पर बंद नही की & उसका 1 हाथ कोट के अंदर ही रहा.

विकी ने अपनी जेब से 2 छ्होटे पॅकेट्स निकाले जिसमे 1 मे सफेद पाउडर था & दूसरे मे छ्होटे-2 टॅब्लेट्स.

विश्वा समझ गया कि विकी 1 ड्रग डीलर था & ये सिकैने & एकस्टसी थे.

"मैं ये सब नही लेता."

"साहब,ना तो मैं पोलीस का आदमी हू ना तो आपको फँसाने की कोशिश कर रहा हूँ.आपके जैसे मैं भी इन लोगों से महुआ लेने आता हूँ.आज आपको देखा तो मेरे अंदर का बिज़्नेसमॅन कहने लगा कि इतने मालदार आदमी को 50 रुपये की शराब क्यू चाहिए....इसीलिए ना कि वो कोई नया नशा चाहता है."

विश्वा ने विकी की आँखों मे घूर के देखा.सच कह रहा था वो.वो नशे मे सुकून ही तो तलाश रहा था.

"..मैं यही नाथुपुरा का रहनेवाला हूँ.शहर मे मेरी मोबाइल शॉप है.थोड़ी एक्सट्रा इनकम के लिए ये धंधा करता हू.भरोसे का आदमी हू साहब.माल भी असली देता हूँ.1 बार ट्राइ करो साहब."

"कीमत क्या है?"

विकी के चेहरे पर मुस्कान फैल गयी.

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वो मोबाइल जिसमे बस 1 ही नंबर. सेव्ड था अचानक बजने लगा.जब्बार चौंक कर उठा,रात के 12 बाज रहे थे.मालिका एकद्ूम नंगी बेसूध उसके बगल मे सोई पड़ी थी.

"हुऊँ",उसने फोन उठाया.

"चिड़िया ने आज दाना चुग लिया."

"वेरी गुड.उसे जाल मे फँसा कर ही छ्चोड़ना."

"डॉन'ट वरी."

जब्बार ने फोन काट दिया.कल्लन ने पहली सीधी चढ़ ली थी.अब देखना था आगे क्या होता है.

राजा यशवीर ने महसूस किया कि मेनका के आने के बाद उनका शानदार महल फिर से उन्हे घर लगने लगा था वरना तो पिच्छले 2 सालों से बस वो यहा जैसे बस सोने & खाने के लिए आते थे.

पर अब उन्हे घर पहुँचने का इंतेज़ार रहता था.मेनका से बातें करने के लिए.वो भी उनसे हर मुद्दे पर बात कर लेती थी.उ��